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Showing posts from September, 2018

तो भैया, तुसाद म्यूजियम क्या है? जानना है तो जरूर पढ़ें…

मोम के पुतलों के लिए दुनिया भर में मशहूर मैडम तुसाद म्यूजियम का 23वां और भारत का पहला संग्रहालय 1 दिसंबर 2017 से राजधानी के कनॉट प्लेस में आम जनता के लिए खोल  दिया गया . यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमिताभ बच्चन, कपिल देव, जस्टिन बीबर, मधुबाला, मिल्खा सिंह, एंजेलिना जोली समेत 50 हस्तियों के पुतले हैं. म्यूजियम में एक दिन में 400 लोगों को ही एंट्री दी जाती है . बता दें, टिकट के लिए एडवांस बुकिंग की सुविधा फिलहाल अभी नहीं है. म्यूजियम सुबह दस बजे से लेकर शाम साढ़े सात बजे तक खुला रहता है  भारत से बड़ी संख्या में लोग तुसाद म्यूजियम देखने दूसरे देश जाते हैं, इसलिए इसे भारत में खोलने का निर्णय लिया गया. म्यूजियम के महाप्रबंधक अंशुल जैन के मुताबिक, देश की कई हस्तियों ने दुनिया के दूसरे म्यूजियम में जगह बनाई है. उन्होंने बताया कि हर क्षेत्र में सर्वे के बाद पब्लिक डिमांड पर पुतले तैयार किए गए हैं. एक पुतले को बनाने में ढाई करोड़ रुपये तक का खर्च आता है तुसाद म्यूजियम में प्रति व्यक्ति टिकट 960 रुपये होगी 18 से कम उम्र वालों का टिकट 7...

बप्पा खुश तो आप भी खुश

आइये हम आपको बताने जा रहे हैं   की देवों में सर्वत्र पूजनीय गणपति बप्पा को कहां किस तरह के स्थापित करना चाहिए और गणेश जी कैसे आपके घर का वास्तु सुधार सकते हैं। सुख , शांति , समृद्धि की चाह रखने वालों को   सफेद रंग   के विनायक की मूर्ति लाना चाहिए।साथ ही , घर में इनका एक स्थाई चित्र भी लगाना चाहिए। सर्व मंगल की कामना करने वालों के लिए   सिंदूरी रंग   के गणपति की आराधना अनुकूल रहती है। – घर में पूजा के लिए गणेश जी की शयन या बैठी मुद्रा में हो तो अधिक शुभ होती है। यदि कला या अन्य शिक्षा के प्रयोजन से पूजन करना हो तो नृत्य गणेश की प्रतिमा या तस्वीर का पूजन लाभकारी है। घर में बैठे हुए और बाएं हाथ के गणेश जी विराजित करना चाहिए। दाएं हाथ की ओर घुमी हुई सूंड वाले गणेशजी हठी होते हैं और उनकी साधना-आराधना कठीन होती है। वे देर से भक्तों पर प्रसन्न होते हैं। कार्यस्थल पर गणेश जी की मूर्ति विराजित कर रहे हों तो खड़े हुए गणेश जी की मूर्ति लगाएं। इससे कार्यस्थल पर स्फूर्ति और काम करने की उमंग हमेशा बनी रहती है।कार्य क्षेत्र पर किसी भी भाग में वक्रतुण्ड की...

कैसे पहचानोगे, सेंटीमीटर में मीटर जो लग गया है

3 इडियट्स , का वह मिलीमीटर पहले तो सेंटीमीटर में बदला था और अब वह इतने बड़े मीटर में बदल गया की , शायद , आपको भी न पता हो , चलो ठीक है अगर आपको नहीं पता है तो  पता चल जायेगा की मिलीमीटर का मीटर तक सफर कैसा रहा। 2009 में तीन दोस्तों , रेंचो (आमिर खान) , फरहान कुरैशी (रंगनाथन माधवन) और राजू रस्तोगी (सरमन जोशी ) , की धमाकेदार कहानी हम सबके बीच आयी और फ़िल्मी दुनिया में अपना एक अलग ही मुकाम कायम कर लिया था।  हम आज भी उन्हें दोस्ती के सच्चा मतलब बताने और एक नया नजरिया दिखाने के लिए धन्यवाद करते है , शायद वैसे मूवी कभी बने और वैसे ही किरदार उसमे शामिल हों।  बाबा रेंचो की बातो का कोई जबाब ही नहीं है , लेकिन अगर हम बात करें अपने मिली मीटर की तो उसकी हर अदा , हंसाने वाले वो जोक और बैचलर्स को परेशान करना एक दम अलग ही था. मिली मीटर का सफर सेंटीमीटर तक तो मूवी में ही हो गया था , और अब सेंटी मीटर से मीटर तक की सफर की बात करें तो इस दौरान उन्होंने काफी बड़े मुकाम हांसिल किये हैं और अब उनका नाम उनकी दुनिया में राहुल कुमार के रूप में है...

देश सेवा ही मेरा धर्म है और यही मेरी पहचान है

'74 साल का बूढ़ा हो चला हूं , ... आठ साल पहले इसी लाल बत्ती पर मैंने इकलौते बेटे को खोया। तब से हर रोज इसी चौक पर हजारों ट्रैफिक के बीच औरों की शक्ल में सिर्फ बेटा नजर आता है। '... कहते हुए गंगाराम की आंखें भर आईं। आप सोच रहे होंगे कौन हैं गंगाराम। ... कभी सीलमपुर(नेट पर देखा तो दिल्ली में है) के सबसे बिजी चौक पर जाएं , तो हैवी ट्रैफिक को ढीली ढाली वर्दी पहने , हाथ में डंडा लिए कंट्रोल करते नजर आएंगे गंगाराम। उनके हाथ के इशारे पर ट्रैफिक पूरी तरह अनुशासित तरीके से थमता चलता नजर आएगा। पिछले 30 साल से इसी चौक पर हर रोज सुबह 8 से रात 10 बजे तक गंगाराम ट्रैफिक पुलिस जैसी वर्दी पहने मुस्तैद हैं।उम्र के इस पड़ाव पर अब तक रिटायर क्यों नहीं। क्योंकि वे असल में पुलिस वाले हैं ही नहीं। सवाल उठता है कि बुढ़ापे में मुफ्त की नौकरी क्यों। दरअसल , गंगाराम की जिंदगी हमेशा ऐसी नहीं थी। उन्हीं के मुताबिक- 30 साल पहले की बात है। मेरा भी अच्छा खुशहाल परिवार था। मेरी टीवी रिपेयरिंग की दुकान थी सीलमपुर के अंदर। वायरलेस वगैरह भी रिपेयर करता था। मेरा बेटा भी साथ में टीवी रिपेयर करता था। ट्...

नालंदा:एक अद्भुत परिचय

तुर्की के मुस्लिम शासक बख्तियार खिलजी जिसका पूरा नाम इख्तियारुद्दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी था, जब उसका हिंदुस्तान पर राज था तो उसने पुरे नालंदा विश्वविद्यालय जलवा दिया था और यहां के पुस्तकालय में इतनी पुस्तकें थी की पूरे तीन महीने तक आग जलती रही लेकिन खिलजी यहीं नहीं रुका उसने अपनी शैतानियत का परिचय देते हुए यहां के कई धर्माचार्य और बौद्ध भिक्षुओं की भी हत्या करा दी थी . कई हिस्टोरियन विश्व-प्रसिद्ध नालंदा विश्वविद्यालय में आग लगाने के पीछे जो कारण बताते हैं उसके अनुसार एक बार बख्तियार खिलजी बहुत ज्यादा बीमार पड़ गया और उसके हकीमों ने इसका काफी चिकित्सा की लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ, तब खिजली को नालंदा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद शाखा के प्रधान राहुल श्रीभद्रजी से इलाज कराने की सलाह दी गई लेकिन बख्तियार ने इलाज से पहले शर्त लगा दी की वह किसी भारतीय दवा का उपयोग नहीं करेगा और अगर वह स्वस्थ नहीं हुआ तो प्रधान वैद्य को मौत की नींद सुला देगा. रात भर आचार्य इसके बारे में सोचते गये और उसके पास कुरान लेकर गए और कहा कि कुरान के इतने पन्ने रोज पढिए ठीक हो जाएंगे. वैद्यराज राहुल श्रीभद्...