
आइये हम आपको लिए चलते भारतीय सेना के उस रहस्य से अवगत कराने जिसे सुनकर कोई भी पहली बार में
विश्वास नहीं करता है |
रहस्य का नाम है " बाबा हर भजन सिंह "
जी हाँ, यह एक
ऐसे भारतीय सेना के गौरव गाथा से जुड़े हुए महान व्यक्ति हैं जिनकी शक्तियां
जग-व्यापी हैं। खैर पहली बार में इनकी
कहानी सुनने के बाद उस पर कोई विश्वास नहीं करता है क्योंकि बाबा जी कहानी है ही
कुछ ऐसी।
दरअसल, जैसा की हमने ऊपर कई बार "बाबा" शब्द का प्रयोग किया है तो
आप इससे ये न समझियेगा की बाबा हरभजन सिंह कोई साधु महत्मा थे, जी हाँ
ऐसा बिलकुल भी नहीं है की बाबा कोई साधु महात्मा थे। बाबा एक ऐसे देश भक्त हैं जो अपनी मृत्यु के 50 साल बाद
भी अपने देश की सरहदों की रक्षा में तैनात है, अब शायद ये बातें कुछ फिल्मी सी लगे लेकिन
नहीं ये कोई फ़िल्मी कहानी नहीं है.
3 अगस्त 1941 को पंजाब के कपूरथला में जन्मे हरभजन सिंह ने अपनी
प्रारम्भिक शिक्षा गांव में रहकर की और उसके बाद उन्होंने मार्च 1955 में हाई
स्कूल की परीक्षा DAV हाई स्कूल से की। जून 1956 में , हरभजन
सिंह ने अमृतसर में बतौर सैनिक सिग्नल कोर में शामिल हो गए और यही से उनका
भारतीय सेना को अपनी सेवा प्रदान करने का
मौका मिला।
कुछ साल बाद 30 जून 1965 में उन्हें एक कमीशन प्रदान की गयी और वो देश के '14 राजपूत
रेजिमेंट ' में तैनात हो गए। साल 1965 में उन्होंने
भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपनी रेजिमेंट के लिए महत्वपूर्ण कार्य किये। इसके बाद हरभजन सिंह का स्थानांतरण “18 राजपूत
रेजिमेंट” में हो गया।
मृत्यु पल का आगमन
साल था 1968 का और हरभजन सिंह “23वें पंजाब रेजिमेंट” में
अपने कुछ साथियों के साथ वे सिक्किम भारत-चीन सीमा पर तैनात थे, 4 अक्टूबर 1968, को पूर्वी सिक्किम
से ताकुला को खच्चरों का एक काफिले को लेकर जा रहे थे इस दौरान पैर फिसलने जाने से
वो एक नाले में गिर गए और नाले में पानी का बहाव इतना तेज था की उनकी लाश 2
किलोमीटर आगे जाकर लगी, बाद में भारतीय सैनिको के तलाश के दौरान जब लाश भी नहीं मिली तो सेना के आला
कमान अधिकारीयों ने हरभजन सिंह को भगौड़ा घोषित कर दिया।
कुछ दिन बीत जाने के बाद बाबा अपने एक साथी सिपाही के सपने में अपनी
मृत्यु के आगमन और लाश के ठिकाने को बताने के लिए आये, साथी
सिपाही ने जब ये बात अफसरों से बताई तो पहले तो किसी ने यकीन नहीं किया लेकिन बाद में साथी
सैनिक की बात को मान कर खोज-बीन चालू की गयी और खोज-बीन सफल रही, बात एक
दम सच साबित हुयी तो सभी ने अपने सोचे हुए गलतफहमी के खेद जताया और बाबा की समाधि
"छोक्यो छो" नमक जगह पर बनवायी।
मान्यता
मान्यता है की बाबा जी अपने साथी सैनिक प्रीतम सिंह के सपने में आये
थे और उनको अपनी सारी कहानी सुनाई और अपनी समाधि बनवाने के लिए अपनी इच्छा जाहिर
की, जो बाद
में सेना के आला अधिकारीयों द्वारा अमल लायी गयी और नतीजन बाबा की समाधि बनवा दी
गयी।
कई बार चीनी सैनिकों के मुख़ार-बिंदु से बाबा के दर्शन होने की बात भी
सुनी गयी है और विस्वास चीनी सैनिको इस पर इतना ज्यादा हैं की हर जब कोई मीटिंग
होती है तो उनके लिए अलग से एक कुर्सी खाली ही छोड़ दी जाती है।
सेना का विस्वास आज भी बाबा पर उसी चरम पर है जैसा की पहले था, और होना
भी चाहिए क्योंकि सीमा पर तैनात सैनिकों के मुँह ऐसा कई बार सुना गया है की ड्यूटी
के दौरान अगर उनको अगर थोड़ी सी भी झपकी आये तो कोई अदृस्य शक्ति आकर उनको झकझोर
देती है जिससे उनकी नींद खुल जाती है सभी का मानना है बाबा उनकी हर संभव मदद करते
हैं।
सेना के विश्वास परम्परा के
बाद, आते हैं
देश की जनता के विस्वास पर, मान्यता यह है की यहाँ रखे पानी की बोतल में चमत्कारिक गुण आ जाते हैं
जिसके 21 दिन के सेवन के बाद श्रद्धालु अपने रोगों से छुटकारा पा जाते हैं।
बाबा आज भी करते हैं देश सेवा
मान्यता है की बाबा आज भी देश सेवा में निरंतर लगे हुए हैं बीते कई
सालों से बाबा के अथक प्रयासों और देश सेवा को ध्यान में रखते हुए उनकी पदोन्नति
कर दी गयी है और बाबा सैनिक से कप्तान हो गए हैं. आस्था का लगन इतनी है की भारतीय
सेना भी उनको सेवरात मानते हुए हर साल १९
सितम्बर से १९ नवम्बर तक बाबा की छुट्टी मंजूर करते है और बड़ी श्रद्धा के उनके
वर्दी , जूते, टोपी और साल भर का वेतन, दो सैनिकों के साथ नाथुला से जलपाईगुड़ी
रेलवे स्टेशन तक लाते हैं। वहां से
डिब्रूगढ़-अमृतसर एक्सप्रेस से उन्हें जालंधर पंजाब लाया जाता है। यहाँ से सेना की गाड़ी स्टेशन से उनको उनके गांव
तक छोड़ने जाती है। वहां सब कुछ उनकी माता जे को सौंप दिया जाता है। फिर उसी ट्रैन
से उनको सम्मान सहित वापस नाथुला लाया जाता है।
कुछ लोग इसे अंध विस्वास को
बढ़ावा देने वाला कदम मानते थे अतः उन लोगों ने अदालत का दरवाजा खट-खटाया और नदीजा
यह हुआ की उनकी छुटियाँ रोक दी गयी।
सेना ने दिया है सम्मान
सेना ने बाबा हर भजन सिंह को बहुत ही सम्मान दिया हुआ है उनके मंदिर
में ही उनके लिए एक कमरा बना दिया गया है और सेवा में जवानो को हाजिर किया गया है , सेवा में
लगे जवानो का कहना है की रोज रात में बाबा का बिस्तर लगाया जाता है और सुबह होने
पर बिस्तर पर सलवटें पायी जाती हैं और जूतों में कुछ कीचड़ टाइप का मिलता है।
आज बाबा जी की 50वीं पुण्य तिथि है, बाबा जी को सत-सत नमन। अगर
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साथ। जय हिन्द, जय
भारत। जय जवान, जय किसान


